मैं अपनी पत्नी को सारी औपचारिकताएँ पूरी करवाकर छोड़ चुका था। उड़ान में बस कुछ ही मिनट बाकी थे, और फिर भी उसने मुझसे कहा कि मैं फ्लाइट रद्द कर दूँ और उसके साथ होटल लौट चलूँ…
रोहित, जो एक बेहद ख़याल रखने वाला पति है, मेरे साथ दिल्ली आने का फैसला करता है, जबकि यहाँ उसका कोई काम नहीं था। उसने कहा,
“मैं तुम्हें छोड़ने आना चाहता हूँ, और वैसे भी हमें साथ में थोड़ा घूमने का मौका मिल जाएगा।”
उसकी इस चिंता और प्यार से मैं बहुत खुश थी, इसलिए मैंने हाँ कह दी।

यात्रा बहुत अच्छी रही। मेरा काम समय से पहले पूरा हो गया, और हमने पूरा दोपहर इंडिया गेट के आसपास टहलते हुए बिताया—कुल्फ़ी खाई, बातें कीं और ढेर सारी यादगार तस्वीरें लीं।
शाम को हम इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचे, जहाँ से हमारी मुंबई की फ्लाइट रात 9 बजे थी। चेक-इन की सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी, और बोर्डिंग में लगभग 20 मिनट बाकी थे। मैं और रोहित वेटिंग एरिया में हाथ में हाथ डाले बैठे थे, हँसते-मुस्कुराते हुए बातें कर रहे थे।
तभी अचानक रोहित ने मेरी ओर देखा। उसकी आँखों में एक अजीब-सी गंभीरता थी। उसने कहा,
“अनन्या, क्यों न हम यह फ्लाइट रद्द कर दें? मैं चाहता हूँ कि हम पास के किसी होटल में रुक जाएँ।”
मैं सन्न रह गई। मुझे लगा वह मज़ाक कर रहा है।
“तुम क्या कह रहे हो? अब तो बस बोर्डिंग ही बाकी है, फ्लाइट क्यों रद्द करेंगे?”
लेकिन रोहित ने मेरा हाथ और कसकर पकड़ लिया। उसकी आवाज़ में बेचैनी साफ़ थी।
“अनन्या, इस बार मुझ पर भरोसा करो। मुझे अच्छा महसूस नहीं हो रहा। दिल बहुत घबराया हुआ है। आज रात यहीं रुक जाते हैं, कल दूसरी फ्लाइट ले लेंगे, ठीक है?”
अब मुझे भी चिंता होने लगी। रोहित आम तौर पर ऐसे बिना वजह बात नहीं करता था, और उसकी आँखों में सच्ची घबराहट थी। वजह समझ में न आने के बावजूद, मैंने उसकी बात मान ली।
हम टिकट काउंटर पर गए, निजी कारण बताकर फ्लाइट रद्द करवाई, और एयरपोर्ट के पास ही एक होटल में कमरा ले लिया।
होटल जाते हुए मैंने पूछा,
“रोहित, अचानक ऐसा क्यों? क्या कोई बात है?”
उसने बस सिर हिला दिया।
“मुझे खुद भी ठीक से नहीं पता… लेकिन मुझे लग रहा है कि यह फ्लाइट सुरक्षित नहीं है। मैं तुम्हारे साथ कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।”
उस रात हम होटल में ही रुके। साथ में खाना खाया, फिल्म देखी और खुद को सामान्य रखने की कोशिश की, हालाँकि मेरे मन में अब भी कई सवाल थे।
अगली सुबह जैसे ही मैं उठी, रोहित ने टीवी चालू किया। जो खबर आई, उसने मुझे अंदर तक हिला दिया—वही फ्लाइट, जिसे हम पिछली रात लेने वाले थे, उड़ान भरने के तुरंत बाद गंभीर तकनीकी खराबी का शिकार हो गई थी। विमान को बेंगलुरु में आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। सौभाग्य से कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन सभी यात्री बेहद घबरा गए थे। अगर हमने फ्लाइट रद्द न की होती, तो हम भी उसी विमान में होते।
मैंने रोहित की ओर देखा, मेरी आँखों से आँसू बहने लगे।
“तुम्हें… कैसे पता चला?”
रोहित ने मुझे कसकर गले लगा लिया, उसकी आवाज़ भर्रा गई।
“मुझे नहीं पता, अनन्या। लेकिन एयरपोर्ट पर बैठे-बैठे मुझे बहुत बेचैनी हो रही थी, जैसे कोई अंदर से चेतावनी दे रहा हो। मैं तुम्हें किसी भी हाल में खतरे में नहीं डाल सकता था।”
मैंने उसे और कसकर पकड़ लिया। उस पल मुझे एहसास हुआ कि मैं कितनी भाग्यशाली हूँ कि मेरे पास ऐसा पति है, जो मेरी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखता है।
अगले दिन हम एक दूसरी फ्लाइट से मुंबई लौटे—सुरक्षित और शांत।
उस घटना के बाद से मैंने रोहित की अंतर्ज्ञान पर भरोसा करना सीख लिया, और उसके प्यार की कद्र और भी ज़्यादा करने लगी। वह रद्द की गई फ्लाइट आज भी हमारी शादी की सबसे यादगार घटना है—जो मुझे यह याद दिलाती है कि कभी-कभी अचानक लिया गया एक फैसला पूरी ज़िंदगी बचा सकता है।
