जिस ऑफिस में पत्नी क्लर्क थी उसी में तलाकशुदा पति आईएस बना। फिर जो हुआ इंसानियत रो पड़ी। दोस्तों यह सच्ची कहानी बिहार प्रदेश के पटना शहर की है। जहां एक छोटे से किराए के कमरे में रहने वाला अभिमन्यु यूपीएससी की तैयारी में दिनरा लगा रहता था। और उसी शहर के सरकारी कार्यालय में क्लर्क बनी उसकी पत्नी सुप्रिया। धीरे-धीरे उससे उतनी ही दूर होने लगी। जितना पास वह शादी के पहले दिनों में थी। शादी को अभी छ महीने हुए थे। लेकिन इन छ महीनों में अभिमन्यु की जिंदगी तीन चीजों के इर्दगिर्द सिमट कर रह गई। किताबें, नोट्स और असफलताएं।

शादी से पहले वह दो बार यूपीएससी में फेल हो चुका था। शादी के बाद उसने तीसरी बार परीक्षा दी। लेकिन रिजल्ट फिर वही निकला। उस दिन घर में एक भारी खामोशी थी जिसे सिर्फ सुप्रिया की कड़वी आवाज ने तोड़ा। कब तक रिश्तेदारों को जवाब दूं? कब तक कहती फिरूं कि मेरा पति अभी भी तैयारी कर रहा है। तीन बार फेल होने के बाद भी तुम्हें शर्म नहीं आती। अभिमन्यु ने धीमे स्वर में कहा। मैं कोशिश कर रहा हूं। थोड़ा वक्त और उसने उम्मीद की थी कि सुप्रिया कम से कम उसकी बात समझेगी। लेकिन आज उसके चेहरे पर ऐसा भाव था जैसे वह अब इस विवाह को बोझ की तरह महसूस करने
लगी हो। धीरे-धीरे उसके लहजे में चिड़चिड़ापन आ गया। नजरें बदल गई। बातें छोटी-छोटी बातों पर तानों में बदलने लगी। और सबसे ज्यादा वो अब अभिमन्यु को पहले जैसा पति नहीं। एक असफल व्यक्ति की तरह देखने लगी। सुप्रिया रोज अपने दफ्तर जाती। जहां उसे एक दुनिया मिली थी। जहां लोग उसकी तारीफ करते, जहां उसे सम्मान मिलता। जहां कोई उसके पति की असफलता का मजाक नहीं उड़ाता था। बस यही फर्क उसे घर की शांति से ज्यादा बाहर की चमक में खींचने लगा। कुछ ही दिनों में उसकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गया। वो देर से लौटने लगी। फोन पासवर्ड में रखने लगी। बात-बात पर तनाव
दिखाने लगी। एक शाम वह बोली आज ऑफिस में एएसओ साहब ने कहा कि मैं जितनी स्मार्ट हूं मुझे बहुत पहले बड़ा पद मिल जाना चाहिए था। कह रहे थे कि मेरी फाइल सबसे साफ होती है। अभिमन्यु ने हल्की मुस्कान देकर पूछा अच्छा है। लेकिन तुम खुश कम लग रही हो। सुप्रिया ने तिरछा जवाब दिया। खुश तब होती जब तुम भी कुछ कर पाते। यह शब्द किसी चाकू से कम नहीं थे। लेकिन अभिमन्यु ने कोई लड़ाई नहीं की। वह जानता था कि उसकी असफलता %LS
