अनन्या समाज की नज़र में कोई “आदर्श सुंदर” महिला नहीं थी। वह मोटी थी, उसके चेहरे पर जन्म से निशान था, और वह स्वभाव से शर्मीली थी। लेकिन उसकी सूरत के पीछे एक सच्चाई थी—वह ए.एस. फार्मा लिमिटेड, एशिया की सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक की मालकिन थी। वह अरबपति थी, फिर भी बेहद सादा जीवन जीती थी।
उसकी दौलत की वजह से कई पुरुष उसके करीब आए, लेकिन अनन्या जानती थी कि ज़्यादातर लोग सिर्फ पैसे के लालच में हैं। तभी उसकी ज़िंदगी में राहुल आया।
राहुल एक मॉडल था—हैंडसम, फिट और बातों में माहिर। उसने अनन्या को यह एहसास दिलाया कि वह दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत है।
“मुझे तुम्हारे पैसे नहीं चाहिए, अनन्या,” राहुल ने प्रपोज़ करते समय कहा था।
“मुझे तुमसे प्यार है—तुम्हारे दिल से।”
अनन्या ने उस पर भरोसा कर लिया। पहली बार उसे लगा कि कोई उसे सच में, बिना शर्त प्यार करता है।
शादी का दिन आ गया। मीडिया इसे “साल की सबसे बड़ी शादी” कह रही थी। आयोजन गोवा के एक लग्ज़री बीच रिसॉर्ट में था। देश के बड़े उद्योगपति, सेलेब्रिटी और राजनेता—सब मौजूद थे।
अनन्या ब्राइडल सुइट में तैयार हो रही थी। वह खुशी से चमक रही थी।
“मैम, एक मिनट,” उसने मेकअप आर्टिस्ट से कहा।
“मैं राहुल को उसका सरप्राइज़ गिफ्ट देना भूल गई।”
अनन्या ने राहुल के लिए एक घड़ी खरीदी थी—एक रोलेक्स, जिस पर खुदा था:
“हमेशा तुम्हारी”।
वह चाहती थी कि मंडप में मिलने से पहले यह तोहफ़ा खुद उसके हाथों दे।
बिना किसी को बताए, वह दूल्हे के कमरे की ओर चल पड़ी—पूरा सरप्राइज़ रखने के लिए।
कमरे के पास पहुँचते ही उसे ज़ोरदार हँसी सुनाई दी। दरवाज़ा थोड़ा खुला था। अंदर राहुल था, उसका बेस्ट मैन अर्जुन, और राहुल की माँ श्रीमती कविता।
अनन्या रुक गई। वह सुनने लगी।
“यार, सच में कमाल है तू,” अर्जुन हँसते हुए बोला।
“पक्का है? उस मोटी औरत से शादी कर रहा है?”
अनन्या का शरीर ठंडा पड़ गया।
राहुल आईने में अपनी टाई ठीक करते हुए बोला,
“चुप रह, आवाज़ धीमी कर। शादी तो करूँगा ही।
तुझे पता है उसकी नेट वर्थ कितनी है? पाँच हज़ार करोड़ रुपये।”
“पर संभाल पाएगा क्या?” अर्जुन ने मज़ाक उड़ाया।
“हनीमून पर क्या करेगा? कहीं दब ही न जाए!”
तीनों ज़ोर से हँस पड़े। राहुल की माँ, श्रीमती कविता, भी हँसने लगीं।
“बेटा,” उन्होंने कहा,
“बस एक साल सहन कर लेना। शादी के बाद सब कुछ जॉइंट प्रॉपर्टी हो जाएगा।
फिर चाहो तो दूसरी औरत रख लेना। बस ये ध्यान रहे कि वो सारे काग़ज़ों पर साइन कर दे।”
“बिलकुल, माँ,” राहुल बोला।
“सच बताऊँ तो उसे चूमते वक्त भी मुझे घिन आती है। उसकी त्वचा… उफ।
पर मैं बस ये सोच लेता हूँ कि मैं चेक को चूम रहा हूँ।
थोड़ी सी एक्टिंग है। शादी के बाद—दुनिया मेरी होगी।”
अनन्या को ऐसा लगा जैसे उसके दिल में हज़ार सुइयाँ चुभ गई हों।
जिस आदमी को वह अपना राजकुमार समझ रही थी, वह एक राक्षस निकला।
जिस परिवार को वह अपना समझ रही थी, वह उसकी पीठ पीछे उसका मज़ाक उड़ा रहा था।
आँसू उसके गालों पर बहने लगे।
वह चाहती थी कि अंदर जाकर राहुल को ज़ोरदार थप्पड़ मारे।
वह चाहती थी कि उसी पल शादी रद्द कर दे।
लेकिन वह रुक गई।
अगर मैं अभी पीछे हटी, तो मैं हार जाऊँगी, उसने सोचा।
ये लोग सोचेंगे मैं कमज़ोर हूँ। सोचेंगे कि मैं टूट गई।
अनन्या ने अपने आँसू पोंछे।
हॉलवे के शीशे में खुद को देखा—एक मोटी औरत, चेहरे पर जन्म-चिह्न…
लेकिन उसी के साथ उसने उस औरत को भी देखा जिसने अरबों की कंपनी खड़ी की थी।
“मैं तुम्हें मुझे रुलाने नहीं दूँगी,” उसने धीमे से कहा।
“तुम लोगों को तमाशा चाहिए?
तो मैं तुम्हें तमाशा दिखाऊँगी।”
अनन्या वापस अपने कमरे में गई।
उसने तुरंत अपने पर्सनल वकील और कंपनी के आईटी हेड को कॉल किया।
“एडवोकेट,” उसने ठंडी आवाज़ में कहा,
“मुझे आपसे अभी एक काम करवाना है।
अभी।”
समारोह शुरू हुआ।
समुद्र तट पर सजा मंडप बेहद खूबसूरत लग रहा था।
अनन्या फूलों से सजे रास्ते पर धीरे-धीरे आगे बढ़ी। उसके चेहरे पर एक शांत मुस्कान थी।
मंडप में राहुल खड़ा था, आँखों में आँसू लिए—नकली आँसू—और उसे देख रहा था।
“कमाल का अभिनेता है,” अनन्या ने मन ही मन कहा।
जब वे पंडित जी के सामने पहुँचे, तो विवाह की रस्में शुरू हुईं। सब कुछ सामान्य और खुशहाल दिख रहा था।
पहली पंक्ति में बैठी राहुल की माँ, श्रीमती कविता, भी रूमाल से आँसू पोंछ रही थीं—वे भी नकली थे।
फिर आया सात फेरों से पहले वचनों का समय।
राहुल ने माइक्रोफोन उठाया।
“अनन्या, मेरी जान।
जब से मैं तुमसे मिला हूँ, मेरी दुनिया बदल गई।
मैंने तुम्हें इसलिए नहीं चाहा कि तुम्हारे पास क्या है,
बल्कि इसलिए कि तुम कौन हो।
मैं जीवन भर तुम्हारी देखभाल करने का वादा करता हूँ।”
तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी।
“आह, कितना रोमांटिक है,” मेहमान फुसफुसाने लगे।
अब अनन्या ने माइक्रोफोन लिया।
उसने राहुल की आँखों में सीधे देखा।
“राहुल,” उसने कहा। उसकी आवाज़ शांत थी, लेकिन बेहद दृढ़।
“जब मैं तुमसे मिली थी, तो मुझे लगा था कि तुम मेरी दुआओं का जवाब हो।
मुझे लगा था कि तुम मुझे मेरी कमियों के साथ स्वीकार करते हो।”
राहुल मुस्कुराया और सिर हिलाया।
“लेकिन आज,” अनन्या ने आगे कहा,
“मंडप तक आने से ठीक पहले, मुझे एक बात समझ में आई।
तुम बहुत अच्छे हो… अभिनय करने में।”
राहुल के चेहरे पर भ्रम छा गया।
“क-क्या? अनन्या? ये क्या कह रही हो?”
अनन्या ने मेहमानों की ओर रुख किया।
“मैं आप सबके साथ यह साझा करना चाहती हूँ कि राहुल मुझसे इतना ‘प्यार’ क्यों करता है।
मेरे पास आपके लिए एक छोटा-सा वीडियो है।”
यह इशारा था।
मंडप के पीछे लगी विशाल LED स्क्रीन पर IT टीम ने प्ले दबाया।
सबको लगा कि यह उनकी प्रेम कहानी की तस्वीरों का वीडियो होगा।
लेकिन नहीं।
स्क्रीन पर जो दिखा, उसने सबको सन्न कर दिया।
वह ग्रोम सूट का CCTV फुटेज था—आज का ही।
(यह एक हाई-एंड रिसॉर्ट था, हर कमरे में सुरक्षा कैमरे थे, और अनन्या के पास कानूनी एक्सेस था।)
और क्योंकि वीडियो में ऑडियो भी था,
पूरा समुद्र तट राहुल की आवाज़ से गूँज उठा।
“उसे चूमते वक्त मुझे घिन आती है…
मैं बस ये सोच लेता हूँ कि मैं चेक को चूम रहा हूँ।”
“हनीमून पर संभल पाएगा क्या? कहीं दब ही न जाए!”
(राहुल और अर्जुन की हँसी)
“बस एक साल सह लेना…
फिर दूसरी औरत रख लेना।”
(श्रीमती कविता की आवाज़)
पूरा रिसॉर्ट सन्नाटा बन गया।
सिर्फ समुद्र की लहरों और हवा की आवाज़ थी।
राहुल का चेहरा सफेद पड़ गया।
श्रीमती कविता खड़ी हो गईं—लगभग बेहोश।
मेहमानों ने सदमे और घृणा में साँस खींच ली।
“अ-अनन्या! ये… ये एडिटेड है!
AI है! झूठ है!” राहुल चिल्लाया और उसकी ओर बढ़ा।
“मुझे मत छुओ,” अनन्या पीछे हटते हुए बोली।
“ये सब मैंने खुद, तुम्हारे कमरे के बाहर खड़े होकर सुना था।”
फिर वह राहुल की माँ की ओर मुड़ी।
“और आप, आंटी कविता।
मैंने आपको दूसरी माँ समझा था।
लेकिन आप तो इस धोखे की मास्टरमाइंड निकलीं।
आप लोगों को पैसा चाहिए था?
तो लीजिए।”
अनन्या ने एक फाइल निकाली।
“राहुल, यह मेरा तुम्हारे लिए सरप्राइज़ गिफ्ट था।
मुंबई में एक लग्ज़री पेंटहाउस की रजिस्ट्री
और एक नई फेरारी—
सब कुछ तुम्हारे नाम पर।”
राहुल की आँखें फैल गईं।
सब खत्म हो गया।
“लेकिन—”
अनन्या ने दस्तावेज़ सबके सामने फाड़ दिए।
र्र्रिप!
“कचरा… कचरे में ही जाता है।”
“अनन्या, प्लीज़!”
राहुल ज़मीन पर गिरकर घुटनों के बल बैठ गया।
“मैं तुमसे प्यार करता हूँ!
हम बस मज़ाक कर रहे थे!
ये तो ‘लॉकर-रूम टॉक’ थी!”
“तुम मुझसे प्यार नहीं करते, राहुल,”
अनन्या ने ठंडे स्वर में कहा।
“तुम मेरी पाँच हज़ार करोड़ की दौलत से प्यार करते हो।”
उसने पंडित जी की ओर देखा।
“पंडित जी, असुविधा के लिए क्षमा चाहती हूँ।
लेकिन यह विवाह नहीं होगा।”
फिर वह मेहमानों की ओर मुड़ी।
“मेहमानों से अनुरोध है—
चिंता न करें।
खाना-पीना सब प्री-पेड है।
पार्टी एंजॉय कीजिए।
आज हम एक शादी नहीं,
एक ठग से मेरी आज़ादी का जश्न मना रहे हैं।”
अनन्या ने अपना घूँघट उतारा
और राहुल के चेहरे पर फेंक दिया।
“तुम घिनौने हो,” उसने कहा।
वह मुड़ी और मंडप से दूर चल पड़ी।
तालियाँ गूँज उठीं—
शादी के लिए नहीं,
उसकी हिम्मत के लिए।
राहुल वहीं घुटनों पर बैठा रह गया,
अब असली आँसू बहाते हुए—
प्यार के नहीं,
पछतावे के।
भीड़ के सामने उसकी माँ उस पर चिल्ला रही थीं—
“बेवकूफ!
अब सब बर्बाद कर दिया!”
अगले दिन यह खबर हर चैनल की हेडलाइन थी।
शर्मिंदगी और सार्वजनिक आक्रोश के कारण
राहुल का मॉडलिंग करियर खत्म हो गया।
कोई ब्रांड, कोई एजेंसी
उसका नाम नहीं लेना चाहती थी।
श्रीमती कविता को भी
अपने हाई-सोसाइटी सर्कल से निकाल दिया गया।
और अनन्या?
वह और ज़्यादा सफल हुई।
और ज़्यादा आत्मविश्वासी।
और अंदर से कहीं ज़्यादा खूबसूरत।
उसने खुद से सच्चा प्यार करना सीख लिया।
और उसने जान लिया—
सच्चा प्यार कभी अपमान नहीं करता,
कभी नाटक नहीं करता,
और कभी किसी को पैसों के लिए इस्तेमाल नहीं करता।